ग्रेटर नोएडा । परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) डॉ उदित नारायण पांडेय ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेन्सर, प्रेशर हॉर्न एवं हूटर के प्रयोग से हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर अब जनपद में विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ द्वारा इस विषय में सख्त रुख अपनाते हुए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिसके अनुपालन में विभाग द्वारा कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि अभियान के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट यूनियनों, मोटर गैराज एवं वर्कशॉप संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों एवं विधिक प्रावधानों के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही परिवहन विभाग के हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि मोटर गैराज एवं वर्कशॉप का औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि किसी भी स्थान पर मॉडिफाइड साइलेन्सर या ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले उपकरणों की बिक्री अथवा स्थापना पाई जाती है तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम, 1988 के अंतर्गत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन वाहन स्वामियों द्वारा अपने वाहनों में अनधिकृत परिवर्तन किए गए हैं, उनके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे वाहन चलाने वालों के खिलाफ चालान के साथ-साथ ड्राइविंग लाइसेंस को निर्धारित अवधि के लिए अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन वाहनों में मॉडिफाइड साइलेन्सर पाए जाएंगे, उनके पंजीयन प्रमाण-पत्र (आरसी) के निलंबन की कार्यवाही भी प्राथमिकता पर की जाएगी। इसके साथ ही जनपद में प्रवर्तन दलों द्वारा सघन चेकिंग अभियान चलाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रवर्तन कार्यवाही के साथ-साथ जन-जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे आमजन को यह समझाया जा सके कि मॉडिफाइड साइलेन्सर का प्रयोग न केवल अवैध है बल्कि इससे ध्वनि प्रदूषण एवं सड़क सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
संभागीय परिवहन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि निर्देशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा अभियान के तहत की गई कार्यवाहियों की नियमित समीक्षा की जाएगी।














