ग्रेटर नोएडा । फर्जी निवेश कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 17.30 लाख की ठगी के मामले में कार्रवाई; 1,400 से ज्यादा फाइलों में हजारों लोगों का निजी और वित्तीय डेटा मिला
दिल्ली पुलिस की द्वारका जिला साइबर थाना पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे एक अंतरराज्यीय फर्जी निवेश कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से 6 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह कॉल सेंटर एक नामी निवेश/ट्रेडिंग कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को शेयर बाजार और फॉरेक्स ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहा था।
डीसीपी द्वारका ने बताया कि यह कार्रवाई 17.30 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच के दौरान की गई। छापेमारी में पुलिस ने 28 CPU, 25 मोबाइल फोन (जिनमें 3 वही मोबाइल हैं जिनसे शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया था), 2 वाई-फाई राउटर, 1 DVR और 1 ऑडियो-कम-वीडियो रिकॉर्डिंग कैमरा बरामद किए हैं। इसके अलावा 28 CPU में 1,400 से अधिक स्प्रेडशीट मिली हैं, जिनमें हजारों लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी जैसे नाम, PAN नंबर, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मौजूद है।
डीसीपी ने बताया कि द्वारका साइबर थाने में 5 जुलाई 2026 को उत्तम नगर निवासी सुनील कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, कुछ अज्ञात लोगों ने पहले उन्हें एक फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग कराकर भरोसा दिलाया। इसके बाद उन्हें फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश करने के लिए तैयार किया गया। वहां उन्हें नकली मुनाफा दिखाकर बार-बार पैसे जमा कराए गए।
जब शिकायतकर्ता ने अपना निवेश और दिखाया गया मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने अलग-अलग बहाने बनाए और बाद में ट्रेडिंग में नुकसान दिखाकर 17,30,050 रुपये की ठगी कर ली। शिकायतकर्ता 30 मार्च 2026 से आरोपियों द्वारा बताए गए निजी बचत और चालू बैंक खातों में पैसे जमा करता रहा, जब तक उसे ठगी का एहसास नहीं हुआ।
डीसीपी ने कहा कि इस मामले में FIR नंबर 29/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 319 और 61(2) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जिसके बाद डीसीपी कुशल पाल सिंह और अतिरिक्त डीसीपी विकास मीणा के निर्देश पर साइबर थाना टीम ने शिकायतकर्ता से संपर्क करने वाले मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच में उनकी लोकेशन मध्य प्रदेश के इंदौर में मिली।
इसके बाद एक टीम ने इंदौर के थाना सदर बाजार क्षेत्र में मारी माता चौक के पास स्थित एक मार्केट में छापा मारा। यहां एक नामी निवेश/ट्रेडिंग कंपनी की आड़ में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा था।
सभी आरोपी इंदौर के रहने वाले
पुलिस ने मौके से 6 आरोपियों को पकड़ा। सभी को इंदौर की अदालत में पेश करने के बाद ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी कर दिल्ली लाया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है—
* सुमित सिंह चौधरी (23), राज नगर, इंदौर – कॉलर था और लोगों को फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए फंसाता था।
* राहुल सिंह (32), रामानंद नगर, इंदौर – कॉलर था। उसके पास से अपराध में इस्तेमाल सिम कार्ड वाले मोबाइल फोन मिले।
* अश्विनी कुमार (35), सुखलिया, इंदौर – कॉल सेंटर का टीम लीडर था। शिकायतकर्ता से पहली बार संपर्क करने वाला मोबाइल फोन उसके पास से बरामद हुआ।
* महेश सिंह (32), हर्षिद्धि नगर, इंदौर – टीम लीडर था।
* पियूष राठौर (27), कृष्णा बाग कॉलोनी, इंदौर – कॉलर था।
* रविंदर सिंह चौहान (24), छोटा बांगड़दा, इंदौर – कॉलर था। उसके पास से भी ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद हुए।
दिल्ली पुलिस की पूछताछ और जब्त CPU के विश्लेषण में पता चला कि आरोपी अवैध स्रोतों से पहले से शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों का डेटा खरीदते थे। इसके बाद उन्हें फोन कर पहले भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग कराते थे ताकि उनका भरोसा जीत सकें। फिर उन्हें एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश करने के लिए तैयार किया जाता था।
पीड़ितों से निजी बचत और चालू बैंक खातों में पैसे जमा कराए जाते थे। फर्जी प्लेटफॉर्म पर उन्हें नकली मुनाफा दिखाया जाता था ताकि वे और पैसा लगाते रहें। जब कोई अपना पैसा और मुनाफा निकालने की कोशिश करता था, तो आरोपी बहाने बनाते थे और बाद में ट्रेडिंग में नुकसान दिखाकर पूरी रकम हड़प लेते थे।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पिछले 2 से 4 महीने से इस कॉल सेंटर में काम कर रहे थे। उन्हें 10,000 से 14,500 रुपये मासिक वेतन मिलता था। इसके अलावा ठगी गई रकम का करीब 10 प्रतिशत कमीशन भी दिया जाता था। वेतन और कमीशन दोनों नकद दिए जाते थे।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जब्त CPU से मिले डेटा के विश्लेषण में अब तक महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, बिहार समेत देश के कई राज्यों से दर्ज 54.70 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की NCRP शिकायतों का लिंक मिला है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जब्त डेटा का विश्लेषण जारी है। गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य शामिल लोगों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। मामले की आगे की जांच जारी है।














