ग्रेटर नोएडा । अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के खिलाफ किसानों ने जमकर हल्ला बोला। जिले भर में 10 से अधिक किसान संगठन अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए धरने पर बैठे रहे, जिसने प्रशासन और सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
एक ओर जहाँ, संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर धरना दिया, वहीं भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने यमुना एक्सप्रेसवे के अंडरपास के नीचे महापंचायत का आयोजन किया। इसके अतिरिक्त, अन्य कई अंडरपास के नीचे भी किसानों द्वारा अलग-अलग महापंचायतें की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
किसान नेता पवन खटाना ने इस प्रदर्शन को ‘आर-पार की लड़ाई’ करार दिया। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी हर बार केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन किसानों की कोई भी मांग पूरी नहीं की जाती। खटाना ने प्रमुख मांगों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10% विकसित भूखंड किसानों का हक है, लेकिन उसे देने में लगातार आनाकानी की जा रही है। इसके अलावा, किसानों को चार गुना मुआवजा और 64.7% अतिरिक्त मुआवजा भी अभी तक नहीं दिया गया है।
किसानों की शिकायत है कि गांवों में विकास सेक्टरों की तर्ज पर नहीं हो रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। साथ ही, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी नहीं मिल रहे हैं, जिससे उनमें भारी असंतोष है।
पवन खटाना ने स्पष्ट किया कि ये सभी मांगें संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर उठाई गई हैं, और किसान इन्हीं मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने बताया कि इन महापंचायतों में जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। किसानों के इस बड़े जमावड़े और संभावित प्रदर्शनों को देखते हुए जिले भर में विभिन्न स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।














