ग्रेटर नोएडा । शारदा स्कूल ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज, शारदा विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग ने नेशनल सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज (NCAHT), IIT मद्रास के सहयोग से “लोकोमोटर दिव्यांगजनों के लिए पुनर्वास एवं सहायक प्रौद्योगिकी” विषय पर दो दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को लोकोमोटर दिव्यांगता, पुनर्वास तथा सहायक प्रौद्योगिकी के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक एवं व्यक्ति-केंद्रित समझ प्रदान करना था।

कार्यक्रम में अकादमिक, क्लिनिकल, उद्योग तथा दिव्यांगजनों के जीवनानुभव से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे प्रतिभागियों को दिव्यांगता के दृष्टिकोण, दैनिक कार्यों में आने वाली सीमाओं, सहभागिता संबंधी चुनौतियों तथा स्वतंत्र एवं सार्थक जीवन को बढ़ावा देने में पुनर्वास पेशेवरों की भूमिका को समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला में सहायक प्रौद्योगिकी के चयन, कार्यात्मक मूल्यांकन, प्रिस्क्रिप्शन, उपयोगिता, उपयोगकर्ता प्रशिक्षण एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य पुनर्वास पेशेवरों एवं विद्यार्थियों में सहायक प्रौद्योगिकियों को क्लिनिकल प्रैक्टिस तथा समुदाय-आधारित पुनर्वास में प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल एवं आत्मविश्वास विकसित करना था। कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों से लगभग 120 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद थी। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञों के साथ संवाद, पेशेवर विचार-विनिमय तथा अनुभवात्मक सीखने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया। हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, अंतर-विषयक सहयोग और व्यक्ति-केंद्रित पुनर्वास पर केंद्रित इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य एवं पुनर्वास क्षेत्र में दिव्यांगता और सहायक प्रौद्योगिकी के प्रति अधिक समावेशी एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना रहा। यह पहल शारदा स्कूल ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज, शारदा विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावसायिक कौशल विकास तथा साक्ष्य-आधारित पुनर्वास प्रथाओं को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
कार्यशाला में अकादमिक एवं उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ-साथ दिव्यांगता के प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले प्रशिक्षक ने भी अपने विचार साझा किए। द गंगा फाउंडेशन में ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट एवं प्रोग्राम मैनेजर – रिहैबिलिटेशन, सैमसन डेनियल ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण से जुड़े अपने उद्योग एवं क्षेत्रीय अनुभव साझा किए। अनुष्का नानू, फिजियोथेरेपिस्ट (न्यूरोलॉजी), प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन लीड एवं क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट, नेशनल सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज, IIT मद्रास, ने अकादमिक, क्लिनिकल एवं अनुसंधान संबंधी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। वहीं नुरुद्दीन, पैरा-एथलीट एवं द गंगा फाउंडेशन से जुड़े पीयर ट्रेनर, ने अपने जीवनानुभव तथा पीयर-आधारित पुनर्वास के माध्यम से प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. (डॉ.) करुणा सिंह, डीन, शारदा स्कूल ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज, शारदा विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. मयंक शुक्ला, PT, विभागाध्यक्ष, फिजियोथेरेपी विभाग, कार्यशाला के संयोजक रहे। डॉ. मीनाक्षी वर्मा, PT, सहायक प्रोफेसर, तथा डॉ. सुमेधा राबरा, PT, सहायक प्रोफेसर, ने समन्वयक के रूप में कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।














